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Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ में धान खरीदी की तैयारियां तेज, 360 नए केंद्र खोलने का फैसला; सिंचाई योजनाओं के लिए ₹2,800 करोड़ मंजूर
रायपुर। छत्तीसगढ़ में खरीफ सीजन के दौरान धान बेचने वाले किसानों को सुविधा देने के लिए राज्य सरकार ने खरीदी केंद्रों का विस्तार करने का निर्णय लिया है।

रायपुर। छत्तीसगढ़ में खरीफ सीजन के दौरान धान बेचने वाले किसानों को सुविधा देने के लिए राज्य सरकार ने खरीदी केंद्रों का विस्तार करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मुताबिक, इस वर्ष 15 नवंबर से धान खरीदी शुरू करने की तैयारी है और किसानों की सहूलियत के लिए 360 नए धान खरीदी केंद्र खोले जाएंगे। इसके साथ ही खेती को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से नई परियोजनाओं और पुरानी योजनाओं के सुधार पर भी काम किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने रायपुर के सिविल लाइंस स्थित सर्किट हाउस में आयोजित ‘उत्कृष्ट कृषक रत्न सम्मान समारोह’ में ये बातें कहीं। श्रद्धेय मनहरण लाल पाण्डेय की जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया।
धान बेचने के लिए किसानों को मिलेंगे अतिरिक्त केंद्र
राज्य सरकार के अनुसार, 360 नए धान खरीदी केंद्र खुलने से किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए अपेक्षाकृत कम दूरी तय करनी पड़ेगी। इससे मौजूदा केंद्रों पर भीड़ कम करने और खरीदी प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि किसानों को धान बेचने के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए जरूरी इंतजाम किए जा रहे हैं। सरकार का लक्ष्य खरीदी व्यवस्था को अधिक सुलभ बनाना और किसानों के समय व मेहनत की बचत करना है।
हालांकि, नए केंद्र किन स्थानों पर खोले जाएंगे और उनकी सूची कब जारी होगी, इसकी जानकारी संबंधित विभाग की आधिकारिक घोषणा से स्पष्ट होगी।
खेती की लागत कम करने और आय बढ़ाने पर जोर
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि खेती-किसानी छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। प्रदेश की बड़ी आबादी कृषि पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से निर्भर है। ऐसे में किसानों को उचित मूल्य, कृषि ऋण और बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी है।
उन्होंने आधुनिक कृषि तकनीक, जैविक खेती, प्राकृतिक खेती और कृषि अनुसंधान को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। मुख्यमंत्री के अनुसार, इन प्रयासों से खेती की लागत कम करने और उत्पादन क्षमता बढ़ाने में सहायता मिल सकती है।
सिंचाई परियोजनाओं के लिए बड़े बजट का प्रावधान
किसानों को सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए राज्य में नई परियोजनाओं के साथ पुरानी योजनाओं के पुनर्विकास पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में साझा की गई जानकारी के अनुसार:
पिछले दो वर्षों में लगभग 10,000 करोड़ रुपये की नई सिंचाई परियोजनाएं शुरू की गई हैं।
1,500 पुरानी सिंचाई परियोजनाओं के जीर्णोद्धार के लिए करीब 2,800 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
इन कार्यों से सिंचित क्षेत्र में लगभग 76 हजार हेक्टेयर की वृद्धि का लक्ष्य बताया गया है।
इंद्रावती नदी पर मटनार और देऊरगांव सिंचाई परियोजनाओं पर भी काम किया जा रहा है।
इन परियोजनाओं का उद्देश्य अधिक कृषि भूमि तक सिंचाई सुविधा पहुंचाना और किसानों की बारिश पर निर्भरता कम करना है। वास्तविक लाभ परियोजनाओं के पूरा होने और उनके प्रभावी संचालन पर निर्भर करेगा।
किसान क्रेडिट कार्ड और कृषि ऋण का भी किया उल्लेख
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने किसान क्रेडिट कार्ड योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे किसानों को खेती के लिए आवश्यक पूंजी जुटाने में मदद मिली है। उन्होंने कृषि ऋण पर ब्याज का बोझ कम करने के लिए उपलब्ध सुविधाओं का जिक्र किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को समय पर वित्तीय सहायता मिलना जरूरी है, ताकि वे बीज, खाद और अन्य कृषि जरूरतों को पूरा कर सकें। उन्होंने केंद्र सरकार की ओर से कृषि अनुसंधान और आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिए जाने का भी उल्लेख किया।
प्रगतिशील किसानों को किया गया सम्मानित
‘उत्कृष्ट कृषक रत्न सम्मान समारोह’ में मुख्यमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर कार्य करने वाले किसानों को सम्मान प्रदान किया। उन्होंने कहा कि नई तकनीक अपनाने वाले और कृषि क्षेत्र में नवाचार करने वाले किसान अन्य कृषकों के लिए प्रेरणा बन सकते हैं।
कार्यक्रम में वन मंत्री केदार कश्यप ने भी संबोधन दिया। उन्होंने श्रद्धेय मनहरण लाल पाण्डेय के सामाजिक योगदान और जनसेवा को याद किया। समारोह में जनप्रतिनिधियों, गणमान्य नागरिकों, स्मृति संस्थान के सदस्यों और प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों से आए किसानों ने भाग लिया।
किसानों के लिए इन घोषणाओं का क्या महत्व?
धान खरीदी केंद्रों की संख्या बढ़ने से किसानों को उपज बेचने के लिए अधिक विकल्प मिल सकते हैं। दूसरी ओर, सिंचाई परियोजनाओं का विस्तार खेती के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ाने में मदद कर सकता है।
फिलहाल किसानों की नजर 15 नवंबर से शुरू होने वाली धान खरीदी की व्यवस्थाओं, नए केंद्रों की सूची और सिंचाई योजनाओं की प्रगति पर रहेगी।




