छत्तीसगढ़

रायपुर के रावणभाठा मैदान में दशहरे की अनूठी परंपरा

भाटागांव स्थित रावणभाठा मैदान में दशहरे का पर्व अनूठी परंपरा और भव्य आयोजन के साथ मनाया जाता है। यहां विजयादशमी के दिन सुबह रावण की पूजा की जाती है, जबकि शाम को बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में रावण के विशाल पुतले का दहन किया जाता है।

रायपुर के भाटागांव स्थित रावणभाठा मैदान में दशहरे का पर्व अनूठी परंपरा और भव्य आयोजन के साथ मनाया जाता है। यहां विजयादशमी के दिन सुबह रावण की पूजा की जाती है, जबकि शाम को बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में रावण के विशाल पुतले का दहन किया जाता है। मान्यता है कि रावण एक प्रकांड विद्वान और महापंडित था। इसी वजह से उसके विद्वत्ता और अच्छे गुणों को याद करते हुए सुबह उसकी स्तुति की जाती है। इसके बाद शाम को भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और हनुमान जी की जीवंत झांकियां निकाली जाती हैं और रामलीला का मंचन होता है। भगवान श्रीराम के अग्निबाण चलाते ही 60 फीट से अधिक ऊंचा रावण का पुतला धू-धू कर जल उठता है। रावण दहन के दौरान होने वाली भव्य आतिशबाजी आयोजन का मुख्य आकर्षण रहती है। इसे देखने के लिए भाटागांव सहित रायपुर के अलग-अलग इलाकों से हजारों की संख्या में लोग पहुंचते हैं। रावणभाठा मैदान में दशहरा मनाने की परंपरा 150 साल से भी अधिक पुरानी बताई जाती है। राजा-महाराजाओं के समय से चली आ रही यह ऐतिहासिक परंपरा आज भी स्थानीय समितियों और नागरिकों के सहयोग से पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाई जा रही है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button