खड़गे के PM मोदी पर विवादित बयान: ‘जहरीले सांप’ से ‘आतंकवादी’ और ‘बाप’ वाली टिप्पणी तक, जानिए कब-कब हुआ विवाद
Political News: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर की गई टिप्पणियां एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में हैं।

Political News: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर की गई टिप्पणियां एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में हैं। पटना में ‘मोदी का बाप भी जाएगा’ वाली टिप्पणी को लेकर भाजपा ने कड़ी आपत्ति जताई है। इससे पहले भी चुनावी सभाओं में खड़गे के कई बयानों पर विवाद हो चुका है। आइए जानते हैं उन प्रमुख मौकों के बारे में, जब उनकी टिप्पणियों को लेकर सियासी घमासान मचा।
नई दिल्ली। भारतीय राजनीति में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप आम बात है। हालांकि, कई बार राजनीतिक आलोचना के दौरान इस्तेमाल की गई भाषा को लेकर विवाद खड़ा हो जाता है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दिए गए कुछ बयानों को लेकर भी भाजपा और कांग्रेस के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिली है।
पटना में हाल ही में दिए गए बयान के बाद खड़गे की पुरानी टिप्पणियां फिर चर्चा में हैं। इनमें वर्ष 2019 से लेकर 2026 तक के अलग-अलग चुनावी कार्यक्रमों में दिए गए बयान शामिल हैं।
1. पटना में ‘मोदी का बाप भी जाएगा’ वाली टिप्पणी
समय: अक्टूबर 2026 | स्थान: पटना
पटना में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और विपक्षी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई के मुद्दे पर बोलते हुए खड़गे ने विवादित टिप्पणी की।
उपलब्ध विवरण के अनुसार, भीड़ में से किसी व्यक्ति ने कहा कि मोदी कहीं नहीं जाएंगे। इस पर खड़गे ने जवाब में कहा, “मोदी का बाप भी जाएगा।”
बयान सामने आने के बाद भाजपा नेताओं ने इसे प्रधानमंत्री के दिवंगत पिता के प्रति अपमानजनक बताते हुए कांग्रेस से माफी की मांग की। इस टिप्पणी को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई।
2. चेन्नई में PM मोदी को ‘आतंकवादी’ कहने पर विवाद
तारीख: 21 अप्रैल 2026 | स्थान: चेन्नई
तमिलनाडु में एक चुनावी कार्यक्रम के दौरान खड़गे की प्रधानमंत्री मोदी पर की गई टिप्पणी ने विवाद खड़ा कर दिया था। भाजपा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई।
विवाद बढ़ने के बाद खड़गे ने सफाई देते हुए कहा कि उनका आशय प्रधानमंत्री को शाब्दिक अर्थ में आतंकवादी कहना नहीं था। उन्होंने अपनी टिप्पणी को केंद्रीय जांच एजेंसियों के इस्तेमाल और विपक्ष को डराने के आरोपों के संदर्भ में बताया।
इस बयान के बाद राजनीतिक दलों के बीच तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
3. ‘तैमूर लंग’ से तुलना कर केंद्र सरकार पर साधा निशाना
तारीख: 7 नवंबर 2024 | स्थान: मुंबई
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के दौरान मुंबई के बीकेसी मैदान में एक जनसभा को संबोधित करते हुए खड़गे ने केंद्र में गठबंधन सरकार को लेकर टिप्पणी की थी।
उन्होंने भाजपा के लोकसभा चुनाव में 400 से अधिक सीटें जीतने के दावे का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टी अब सहयोगी दलों के समर्थन से सरकार चला रही है। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा था, “दो टांग दूसरों की लगाकर हुकूमत तैमूर लंग कर रहे हैं।”
इस बयान को लेकर भी राजनीतिक विवाद हुआ और भाजपा की ओर से प्रतिक्रिया दी गई।
4. PM मोदी की तुलना ‘जहरीले सांप’ से
तारीख: 27 अप्रैल 2023 | स्थान: कलबुर्गी, कर्नाटक
कर्नाटक विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान खड़गे ने प्रधानमंत्री मोदी को लेकर सांप से जुड़ी विवादित उपमा का इस्तेमाल किया था।
उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी जहरीले सांप की तरह हैं और यदि कोई उसे चाटेगा तो उसकी मौत हो सकती है।
बयान पर भाजपा ने कड़ी प्रतिक्रिया जताई। इसके बाद खड़गे ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि उनकी टिप्पणी का आशय भाजपा और उसकी विचारधारा से था, न कि नरेंद्र मोदी को व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाना।
5. ‘रावण जैसे सौ मुख हैं क्या?’ टिप्पणी
तारीख: 29 नवंबर 2022 | स्थान: अहमदाबाद, गुजरात
गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान अहमदाबाद के बेहरमपुरा में एक रैली में खड़गे ने भाजपा के चुनाव प्रचार पर सवाल उठाए थे।
उन्होंने कहा था कि नगर निगम से लेकर विधानसभा और लोकसभा चुनाव तक भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री मोदी के चेहरे पर जोर दिया जाता है। इसी दौरान उन्होंने सवाल किया था, “भाई तुम्हारी सूरत कितनी बार देखें? क्या आपके रावण के जैसे सौ मुख हैं क्या?”
इस टिप्पणी पर भाजपा ने विरोध जताया था। बयान को लेकर चुनावी माहौल में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए थे।
6. PM मोदी को बताया था ‘झूठों का सरदार’
तारीख: 27 नवंबर 2022 | स्थान: नर्मदा, गुजरात
गुजरात विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान नर्मदा जिले में एक जनसभा को संबोधित करते हुए खड़गे ने प्रधानमंत्री मोदी पर वादे पूरे नहीं करने का आरोप लगाया था।
उन्होंने कहा था कि सरकार ने जनता से कई वादे किए, लेकिन वे पूरे नहीं हुए। इसी दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री को “झूठों के सरदार” कहा था।
यह टिप्पणी भी चुनावी राजनीति में चर्चा का विषय बनी और भाजपा की ओर से इसका विरोध किया गया।
7. 2019 में विजय चौक पर फांसी लगाने वाला बयान
समय: मई 2019 | स्थान: कर्नाटक
लोकसभा चुनाव 2019 के प्रचार के दौरान खड़गे ने प्रधानमंत्री मोदी के उस दावे पर पलटवार किया था, जिसमें कांग्रेस को 40 से अधिक सीटें नहीं मिलने की बात कही गई थी।
इसके जवाब में खड़गे ने चुनौती देते हुए सवाल किया था कि अगर कांग्रेस को 40 से अधिक सीटें मिल जाती हैं, तो क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली के विजय चौक पर जाकर फांसी लगा लेंगे?
इस बयान की भाषा को लेकर भी आलोचना हुई थी। चुनावी मुकाबले के दौरान नेताओं की बयानबाजी पर बहस तेज हो गई थी।
चुनावी राजनीति में भाषा को लेकर फिर बहस
मल्लिकार्जुन खड़गे की इन टिप्पणियों को लेकर अलग-अलग मौकों पर भाजपा और कांग्रेस के बीच विवाद हुआ है। भाजपा ने कई बयानों को प्रधानमंत्री के प्रति व्यक्तिगत हमला बताया, जबकि कुछ मामलों में खड़गे ने अपनी टिप्पणी का संदर्भ स्पष्ट किया।
इन घटनाओं ने चुनावी भाषणों में राजनीतिक आलोचना और व्यक्तिगत टिप्पणियों के बीच की सीमा को लेकर बहस को फिर चर्चा में ला दिया है।
नोट: इस खबर में दिए गए बयानों और तारीखों को प्रकाशित करने से पहले संबंधित भाषणों के मूल वीडियो, समाचार रिपोर्टों और आधिकारिक प्रतिक्रियाओं से सत्यापित करना उचित होगा।




