बलिया में अखिलेश यादव के खिलाफ पोस्टरबाजी से बढ़ा सियासी तनाव, सपा नेता अरविंद गिरी ने मौके पर पहुंचकर फाड़ा पोस्टर
बलिया। उत्तर प्रदेश के बलिया में स्नातक एमएलसी चुनाव के बीच पोस्टर को लेकर राजनीतिक विवाद सामने आया है। कचहरी के नजदीक समाजवादी पार्टी कार्यालय के सामने अखिलेश यादव की तस्वीर वाला विवादित पोस्टर लगाए जाने से सपा नेताओं में नाराजगी देखने को मिली।

बलिया। उत्तर प्रदेश के बलिया में स्नातक एमएलसी चुनाव के बीच पोस्टर को लेकर राजनीतिक विवाद सामने आया है। कचहरी के नजदीक समाजवादी पार्टी कार्यालय के सामने अखिलेश यादव की तस्वीर वाला विवादित पोस्टर लगाए जाने से सपा नेताओं में नाराजगी देखने को मिली। पोस्टर में सपा शासन को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई थी। इसके बाद समाजवादी पार्टी युवजन सभा के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद गिरी मौके पर पहुंचे और पोस्टर फाड़कर अपना विरोध जताया।
पोस्टर पर सपा शासन को लेकर की गई टिप्पणी
सपा कार्यालय के सामने लगाए गए पोस्टर पर अखिलेश यादव की तस्वीर के साथ लिखा गया था, ‘सपाइयों का क्या भरोसा, दंगा, भ्रष्टाचार और बिरयानी, सपा राज की असल कहानी।’ पोस्टर की भाषा को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गईं। चुनावी माहौल के बीच इस घटनाक्रम ने जिले में सियासी सरगर्मी बढ़ा दी।
समाजवादी पार्टी की ओर से इस पोस्टर पर कड़ी प्रतिक्रिया दी गई। सपा नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने पार्टी की छवि खराब करने के उद्देश्य से इस तरह की पोस्टरबाजी की है।
अरविंद गिरी ने भाजपा पर साधा निशाना
पोस्टर की जानकारी मिलने के बाद अरविंद गिरी वहां पहुंचे और उसे फाड़ दिया। उन्होंने इस घटना पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि बलिया की राजनीति की अपनी एक परंपरा और मर्यादा रही है, जिसे इस तरह की गतिविधियों से नुकसान पहुंचता है।
गिरी ने कहा कि बलिया की पहचान पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर और जनेश्वर मिश्र जैसे नेताओं के साथ-साथ शरदानंद अंचल जैसे राजनीतिक व्यक्तित्वों से भी जुड़ी रही है। उनके मुताबिक, इस जिले की राजनीतिक संस्कृति में आपसी सम्मान का महत्व रहा है और ऐसी घटनाएं उस परंपरा के विपरीत हैं।
भाजपा नेतृत्व से की संयम बरतने की अपील
सपा युवजन सभा के प्रदेश अध्यक्ष ने भाजपा के जिलाध्यक्ष और अन्य नेताओं से राजनीतिक विरोध के दौरान मर्यादा बनाए रखने की अपील की। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या जिले में अब राजनीति पोस्टरबाजी और एक-दूसरे के खिलाफ आपत्तिजनक प्रचार तक सीमित रह जाएगी?
उन्होंने कहा कि यदि इस तरह की गतिविधियां नहीं रुकीं, तो समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता भी जवाबी पोस्टरबाजी कर सकते हैं। साथ ही उन्होंने राजनीतिक दलों से ऐसे कदमों से बचने का आग्रह किया, जिनसे जिले का राजनीतिक माहौल खराब हो।
चुनावी माहौल में पोस्टर विवाद ने पकड़ा तूल
बलिया में पोस्टर लगाए जाने की घटना के बाद सपा और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप की स्थिति बन गई है। सपा नेता ने पोस्टर लगाने के लिए भाजपा कार्यकर्ताओं को जिम्मेदार ठहराया है, हालांकि इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
फिलहाल, यह मामला स्थानीय राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है। चुनाव के दौरान सामने आए इस विवाद ने दोनों दलों के बीच बढ़ती राजनीतिक तल्खी को एक बार फिर उजागर कर दिया है।




