छत्तीसगढ़ में SIR के दौरान फॉर्म-7 के दुरुपयोग का आरोप, 25 लाख वोट कटने के दावे पर सियासत गरमाई
छत्तीसगढ़ में SIR पर सियासी घमासान, फॉर्म-7 के दुरुपयोग का आरोप

रायपुर। छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद अकबर ने मतदाता सूची से करीब 25 लाख मतदाताओं के नाम कम होने का दावा करते हुए फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने चुनाव आयोग से पूरे मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच कराने की मांग की है।
शनिवार को रायपुर में आयोजित प्रेस वार्ता में मोहम्मद अकबर ने आरोप लगाया कि SIR की प्रक्रिया के नाम पर सुनियोजित तरीके से मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं। उन्होंने इसके लिए फॉर्म-7 के दुरुपयोग की आशंका जताई और कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया की जांच जरूरी है।
फॉर्म-7 के दुरुपयोग पर उठाए सवाल
मोहम्मद अकबर ने बताया कि फॉर्म-7 का इस्तेमाल मतदाता सूची से किसी नाम को हटाने के लिए दावा या आपत्ति दर्ज कराने में किया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल कर फर्जी शिकायतें की जा रही हैं। उनके मुताबिक, गलत जानकारी देकर या फर्जी शिकायत के जरिए नाम हटाने के मामलों में कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है, जिसमें एक साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
चुनाव आयोग से जांच की मांग
पूर्व मंत्री ने चुनाव आयोग से मांग की कि फॉर्म-7 के माध्यम से मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए प्राप्त आवेदनों और उन पर की गई कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से सूची से न हटे और उसके मतदान के अधिकार की रक्षा हो सके।
SIR की प्रक्रिया पर बढ़ा विवाद
छत्तीसगढ़ में SIR के दौरान मतदाता सूची में नामों की कमी और फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग को लेकर उठे सवालों ने राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। हालांकि, करीब 25 लाख नाम कम होने के दावे और फॉर्म-7 के दुरुपयोग के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए आधिकारिक आंकड़ों और चुनाव आयोग के पक्ष का सामने आना जरूरी है।
मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया के बीच अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चुनाव आयोग इन आरोपों पर क्या कदम उठाता है और नाम हटाने की प्रक्रिया को लेकर क्या स्पष्टीकरण देता




