राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण में अदालत में हलचल, चंपत राय समेत तीन लोगों के खिलाफ अर्जी पर सुनवाई
अयोध्या। अयोध्या के राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी से जुड़े मामले में शुक्रवार को न्यायिक कार्यवाही पर सबकी निगाहें टिकी हैं।

अयोध्या। अयोध्या के राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी से जुड़े मामले में शुक्रवार को न्यायिक कार्यवाही पर सबकी निगाहें टिकी हैं। मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्र और गोपाल नागर कट्टे को आरोपी बनाने की मांग से संबंधित प्रार्थना पत्र पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) की अदालत में सुनवाई होनी है। यह आवेदन अधिवक्ता संघ की ओर से दाखिल किया गया है।
याचिका में तीनों लोगों की कथित भूमिका की जांच कराने और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग उठाई गई है। इस मामले में अदालत के समक्ष रखे गए तथ्यों के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय होगी।
अधिवक्ता संघ ने उठाया जांच का मुद्दा
चढ़ावे की कथित चोरी के मामले को लेकर अधिवक्ता संघ ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। संघ की मांग है कि चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्र और गोपाल नागर कट्टे की भूमिका की भी जांच की जाए और उन्हें मामले में आरोपी बनाए जाने पर विचार किया जाए।
इस संबंध में दाखिल प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के दौरान अदालत का रुख महत्वपूर्ण रहेगा। हालांकि, आवेदन में लगाए गए आरोपों के आधार पर किसी की जिम्मेदारी या दोष को अभी अंतिम रूप से स्थापित नहीं माना जा सकता।
रामशंकर यादव के जब्त वाहनों पर भी होगी सुनवाई
इसी मामले से जुड़े एक अन्य घटनाक्रम में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू की जब्त कार और बुलेट बाइक को वापस दिलाने की मांग वाली याचिका भी अदालत में सूचीबद्ध है।
टिन्नू की ओर से उनके अधिवक्ता ने दोनों वाहनों को मुक्त करने का अनुरोध किया है। इस आवेदन पर स्पेशल जज एंटी करप्शन कोर्ट में सुनवाई होनी है। वाहनों को छोड़ा जाएगा या नहीं, इसका फैसला अदालत के आदेश के बाद ही स्पष्ट होगा।
दो अलग-अलग अर्जियों पर रहेगी निगाह
राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण में शुक्रवार की कार्यवाही के दौरान दो प्रमुख मुद्दे सामने हैं। पहला, तीन लोगों को आरोपी बनाए जाने की मांग पर दाखिल प्रार्थना पत्र और दूसरा, जब्त कार व बुलेट बाइक को रिलीज करने की याचिका।
इन दोनों मामलों में अदालत की कार्यवाही आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण होगी। सुनवाई के बाद आने वाले आदेशों से संबंधित अर्जियों पर आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल, मामले में किसी भी व्यक्ति के खिलाफ आरोपों को अदालत द्वारा अंतिम रूप से सिद्ध किया जाना बाकी है।




