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CG News: छत्तीसगढ़ में धान खरीदी को लेकर बढ़ी हलचल, साय कैबिनेट की बैठक में किसानों से जुड़े प्रस्तावों पर नजर

रायपुर। छत्तीसगढ़ में धान खरीदी का नया सीजन नजदीक आते ही प्रशासनिक तैयारियां तेज हो गई हैं। खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में किसानों से धान उपार्जन की व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट बैठक अहम मानी जा रही है।

रायपुर। छत्तीसगढ़ में धान खरीदी का नया सीजन नजदीक आते ही प्रशासनिक तैयारियां तेज हो गई हैं। खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में किसानों से धान उपार्जन की व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट बैठक अहम मानी जा रही है। बैठक में धान खरीदी की नीति, उपार्जन केंद्रों की संख्या और बारदानों की उपलब्धता जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। किसानों को अब सरकार के आधिकारिक फैसलों का इंतजार है।

नवंबर से शुरू हो सकती है खरीदी प्रक्रिया

प्रस्तावित कार्यक्रम के मुताबिक, प्रदेश में 15 नवंबर 2026 से धान खरीदी शुरू करने और 31 जनवरी 2027 तक जारी रखने की तैयारी है। समय पर खरीदी शुरू करने के लिए संबंधित विभागों को केंद्रों, कर्मचारियों और अन्य जरूरी संसाधनों की व्यवस्था करनी होगी। हालांकि, खरीदी की तारीखों पर अंतिम मुहर शासन की आधिकारिक घोषणा के बाद ही लगेगी।

धान की कीमत और प्रति एकड़ सीमा पर रहेगी नजर

किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल धान की दर और खरीदी की अधिकतम सीमा को लेकर है। प्रस्तावित व्यवस्था में 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर और प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक धान बेचने का प्रावधान चर्चा में है। इन नियमों को लेकर अंतिम स्थिति कैबिनेट के निर्णय और संबंधित सरकारी आदेश के बाद स्पष्ट होगी।

360 नए उपार्जन केंद्र खोलने की तैयारी

धान बेचने के लिए किसानों को ज्यादा दूरी तय न करनी पड़े, इसके लिए प्रदेश में 360 नए खरीदी केंद्र शुरू करने की योजना सामने आई है। नए केंद्रों को मंजूरी मिलने पर ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों को सुविधा मिल सकती है। इससे मौजूदा केंद्रों पर दबाव कम करने और खरीदी प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

160 लाख मीट्रिक टन खरीदी के लक्ष्य की चर्चा

इस खरीफ सीजन में 160 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी का लक्ष्य रखने की तैयारी बताई जा रही है। इतने बड़े लक्ष्य को पूरा करने के लिए बारदानों की उपलब्धता, धान के सुरक्षित भंडारण और परिवहन की व्यवस्था बेहद अहम होगी। कैबिनेट में इन तैयारियों से जुड़े प्रस्तावों पर विचार किया जा सकता है।

बारदानों की व्यवस्था भी अहम मुद्दा

धान खरीदी के दौरान किसानों को समय पर टोकन मिलने और केंद्रों पर उपज जमा करने में परेशानी न हो, इसके लिए पर्याप्त बारदानों की उपलब्धता जरूरी है। सरकार के सामने खरीदी व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के साथ भंडारण और परिवहन की चुनौतियों से निपटने की भी जिम्मेदारी होगी।

कैबिनेट के फैसले से साफ होगी तस्वीर

धान खरीदी छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आय से सीधे जुड़ा विषय है। ऐसे में बैठक में होने वाले फैसलों का असर खरीदी की तैयारियों पर पड़ सकता है। अब सभी की नजरें सरकार की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं, जिससे खरीदी की तारीख, दर, सीमा और नए केंद्रों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

महत्वपूर्ण: 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर, 21 क्विंटल प्रति एकड़ की सीमा, 360 नए केंद्र और 160 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य को अंतिम सरकारी निर्णय के रूप में प्रकाशित करने से पहले संबंधित आदेश से पुष्टि करना जरूरी है।

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